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SPARSH Portal : स्पर्श पोर्टल
Special Project for Assistance, Rehabilitation & Strengthening of Handicapped (SPARSH) - a caring touch for disabled, old and destitute persons
स्पर्श अभियान : प्रस्तावना  

Introduction/प्रस्तावना

The National Policy recognizes that Persons with Disabilities (PwD) are valuable human resource for the country and seeks to create an environment that provides them equal opportunities, protection of their rights and full participation in society. The focus of the policy is on

(a) Rehabilitation Measures
(b) Prevention of Disabilities.

The government is running following major schemes/services to achieve above objectives:
(i) Conduct medical camps and Issue Disability Certificates
(ii) Provide Artificial limbs/aids/appliances
(iii) Preventive/Corrective surgery
(iv) Scholarships for PwD
(v) Financial Assistance of Rs. 500/- per month to MR/MD PwD
(vi) Social Security Pension
(vii) Assistance for Loan for self employment
(viii) Professional Trainings
(ix) Marriage promotion for PwD
(x) Reservation of 6% of all Government posts for PwD
(xi) Provision of Legal Guardianship
(xii) Health Insurance for MR & MD

The State Government has initiated a dedicated SPARSH program to ensure timely assistance under all schemes to all  elegible persons with disabilities and to ensure their mainstreaming in the society.

निःशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 की धारा-2 (झा) में वर्णित निःशक्त, मानसिक मंदत्ता और मानसिक रूग्णता के रूप में परिभाषित किया गया है तथा म.प्र.निराश्रित एवं निर्धन व्यक्ति की सहायता अधिनियम 1970 के अन्तर्गत ऐसे वृद्व एवं शिथिलांग व्यक्ति जिनने आयु 60 वर्ष पूर्ण कर ली हो और वह आजीविका कमाने के लिए असमर्थ हो, जिसमें दृष्टिबाधित, श्रवणवाधित, मानसिक विकलांग, मानसिक बीमारी से ग्रसित या अस्थाई विकलांग हो, आते हैं। यह सभी लोग भारत के नागरिक हैं इनको भी अन्य नागरिकों की तरह समाज में रहने का अधिकार है तथा इनके अधिकारों का संरक्षण सामाजिक, आर्थिक क्षेत्र में भी इन्हें पूर्ण भागीदारी का अधिकार है।

म.प्र.शासन मानसिक मंदत्ता, मानसिक रूग्णता और ऐसे वृद्व शिथिलांग जो अपनी जीविका चलाने के लिए असमर्थ हैं, के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाएं संचालित की हैं। वृद्वजनों एवं निःशक्तजनों को मासिक पेंशन के अलावा जो बहुविकलांग एवं मानसिक रूप से अविकसित हैं उनको रूपये 500/- प्रतिमाह की विशेष आर्थिक सहायता, वृद्वाश्रम एवं आवासीय संस्थाएं संचालित की गई हैं, लेकिन योजनाओं का लाभ इन व्यक्तियों को मिले यह सुनिश्चित करना एक बहुत बड़ी चुनौती है। इस श्रेणी के व्यक्तियों के परिवार के सदस्य परिस्थितिवश भरण-पोषण का दायित्व नहीं उठा पाते हैं और उनका परित्याग करते हैं जिसके फलस्वरूप इनमें से कई लोगों को सड़कों पर भटकना अथवा रहना पड़ता है। न तो इनके पास सोने का स्थान होता है, न ही पहनने के लिए पर्याप्त कपड़े होते हैं, और न ही भोजन की व्यवस्था हमेशा हो पाती है, जिस कारण भीख पर आश्रित होने के लिए भी बाध्य होना पड़ जाता है, जबकि यह सभी समाज में सम्मानपूर्वक जीने के हक रखते हैं। मान. सर्वोच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका क्रमांक 196/2001 मे शहरी क्षेत्र में ऐसे लोग जिनके लिए कोई आश्रय स्थल नहीं है, उनको रात में सोने के लिए स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं, जिसके तहत शासन द्वारा रैन बसेरा स्थापित किये गये हैं। निराश्रित एवं निर्धन व्यक्ति अधिनियम 1970 के अन्तर्गत कई स्थानों पर आश्रमों एवं वृद्वाश्रमों की स्थापना की गई है। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007 में ऐसे व्यक्तियों के भरण-पोषण और आश्रय का प्रावधान है तथा उपरोक्त अधिनियम के अन्तर्गत निःशक्त एवं वृद्वजन के लिए बाधारहित वातावरण, चिकित्सा, परिवहन सुविधा प्राथमिकता पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं।

लीगल सर्विस अथारटी एक्ट 1987 के अन्तर्गत भी निःशक्तजनों को अधिकार दिये गये हैं, लेकिन यह प्रावधान होने के पश्चात्‌ भी निःशक्तों जिसमें मुखय रूप से मानसिक मंदत्ता, मानसिक रूग्णता से पीड़ित व्यक्ति योजना का प्रचार-प्रसार न होने और उनकी पहुंच न होने के कारण उन्हें कानूनी सहायता भी प्राप्त नहीं हो पाती है।

इन सब निर्देशों के उपरान्त भी यह देखने में आता है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक मात्रा में निराश्रित वृद्व, मंदबुद्वि, मानसिक रूग्णता से पीड़ित व्यक्ति दर-दर भटकते रहते हैं, फूटपाथों पर पड़े रहते हैं उनको कोई भी आश्रय उपलब्ध नहीं करा पाता न ही उनको कोई स्पर्श करता है, यह स्थिति बड़ी भयावह लगती हैं। इस भयावह स्थिति को सकारात्मक स्थिति में बदलने के लिए यह जरूरी है कि इन वर्गों के पुर्नवास के कार्य में विशेष रूचि ली जाए। इसके तहत राज्य शासन ने ''स्पर्श अभियान'' चलाने का निर्णय लिया है।